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सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर शादी रजिस्टर कराने वालों के लिए बुरी खबर, हाईकोर्ट ने दे दिया बड़ा झटका

 Written By: Khushbu Rawal
 Published : Oct 29, 2026 09:26 am IST,  Updated : Oct 29, 2026 09:26 am IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में विवाह रजिस्ट्रेशन के नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आधार कार्ड उम्र का प्रमाण नहीं है और बिना सत्यापन वाले स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर भी विवाह का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ आधार कार्ड से शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता। Image Source : WWW.ALLAHABADHIGHCOURT.IN/ MAGNIFIC

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पूरे राज्य में शादी रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को कड़ा करने का निर्देश देते हुए कहा कि आधार कार्ड आयु का प्रमाण नहीं हो सकता, इसलिए केवल आधार कार्ड में दर्ज विवरण या बिना सत्यापन वाले विद्यालय स्थानांतरण प्रमाण पत्र के सहारे विवाह का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाना चाहिए।

उम्र के संदेह पर सामान्य प्रक्रिया में नहीं होगा रजिस्ट्रेशन

जस्टिस तेज प्रताप तिवारी ने दीपक पाल नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि विवाह रजिस्ट्रेशन के दौरान यह सख्ती से सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लड़के की उम्र कम से कम 21 वर्ष और लड़की की उम्र कम से कम 18 वर्ष हो। राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर उम्र वेरिफिकेशन के स्रोत का विवरण दर्ज करना भी अनिवार्य होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि वेरिफिकेशन पूरा नहीं हुआ है, दस्तावेजों से संदेह पैदा होता है या ऐसा प्रतीत होता है कि विवाह करने वाले पक्षों में से कोई एक निर्धारित उम्र से कम है, तो आवेदन को बाल विवाह निषेध अधिकारी या जिलाधिकारी के पास भेजना आवश्यक है।

कैसे सामने आया मामला?

यह मामला कोर्ट के संज्ञान में तब आया, जब विवाह पंजीकरण अधिकारी द्वारा एक विवाह का पंजीकरण स्कूल के स्थानांतरण प्रमाण पत्र और आधार कार्ड के आधार पर किया गया। कोर्ट ने पाया कि स्थानांतरण प्रमाण पत्र का निर्धारित प्रोसेस के अनुसार वेरिफिकेशन नहीं किया गया और इस कारण विवाह पंजीकरण को बरकरार नहीं रखा जा सका। कोर्ट ने कहा कि पंजीकरण अधिकारी के पास विवाह का पंजीकरण करने से पहले आयु का सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं था और उन्होंने अपने कर्तव्य का उचित निर्वहन नहीं किया।

ऑनलाइन सिस्टम में भी बदलाव के निर्देश

कोर्ट ने यूपी सरकार से ऐसी ऑनलाइन व्यवस्था भी बनाने को कहा है, जिसमें केवल आधार ऑथेंटिकेशन के आधार पर विवाह प्रमाणपत्र जारी न हो सके। नई व्यवस्था में दोनों पक्षों की जन्मतिथि के वेरिफिकेशन और उसके स्रोत का रिकॉर्ड रखना होगा। वेरिफिकेशन अधूरा होने या किसी तरह की त्रुटि मिलने पर आवेदन अपने आप आगे नहीं बढ़ना चाहिए।

हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

आधार कार्ड और असत्यापित शैक्षणिक दस्तावेजों पर निर्भरता को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, "आधार कार्ड आयु का प्रमाण नहीं हो सकता और केवल स्थानांतरण प्रमाण पत्र किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94(2)(आई) में उल्लिखित दस्तावेजों की श्रेणी में नहीं आता है।" कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की। 

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़े एक अहम मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर कोई शख्स परिवार का खर्चा नहीं उठा सकता है तो उसे शादी का ख्याल छोड़ देना चाहिए। 

(इनपुट- PTI)

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